दिल्ली हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि केवल विदेश में रहने के आधार पर किसी पिता को उसके बच्चों से मिलने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने साफ किया है कि पिता को केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी अपने बच्चों के साथ समय बिताने का पूरा अधिकार है। यह फैसला कारोबारी अमृतेश जाटिया से जुड़े मामले में आया है। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका मंजूर करते हुए उन्हें बच्चों की अस्थायी कस्टडी दे दी है। अदालत के इस आदेश के बाद अब वह 28 जून से 5 जुलाई तक लंदन में अपने बच्चों के साथ रह सकेंगे।
कारोबारी अमृतेश जाटिया और उनकी पत्नी विधि बिनानी जाटिया के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है। दोनों के दो नाबालिग बच्चे हैं। बच्चे ब्रिटिश नागरिक हैं और लंबे समय तक भारत में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। दिसंबर 2023 में पिता ने दिल्ली की फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर खुद को बच्चों का वैध अभिभावक घोषित करने और स्थायी कस्टडी मांगी थी। साथ ही आशंका जताई थी कि मां बच्चों को उनकी सहमति के बिना विदेश ले जा सकती हैं। उसी समय दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम तौर पर बच्चों के स्कूल को बिना अदालत की अनुमति ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) जारी करने से रोक दिया था, ताकि बच्चों को कोर्ट की जानकारी के बिना विदेश न ले जाया जा सके।
नया विवाद कैसे पैदा हुआ?
बाद में फैमिली कोर्ट ने पिता को बच्चों से मिलने का अधिकार तो दिया, लेकिन यह मुलाकात केवल भारत में करने की अनुमति दी। पिता का कहना था कि उनका काम और निवास लंदन में है, इसलिए केवल भारत तक मुलाकात सीमित करना व्यवहारिक नहीं है। उनका तर्क था कि इससे बच्चों के साथ सामान्य पारिवारिक संबंध बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस तेजस करिया और जस्टिस मधु जैन की अवकाशकालीन पीठ ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि पिता विदेश में रहते हैं, उन्हें बच्चों से विदेश में मिलने से नहीं रोका जा सकता। अदालत ने कहा कि बच्चे के सर्वोत्तम हित का सिद्धांत सबसे महत्वपूर्ण है। यदि सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा सकती हैं, तो पिता को बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताने का अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने 28 जून से 5 जुलाई तक लंदन में बच्चों की अंतरिम कस्टडी पिता को देने का आदेश दिया। यह व्यवस्था अंतिम कस्टडी का फैसला नहीं है, बल्कि अंतरिम राहत है।
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